नयी राजनीति
राजनीति समाज के श्रेष्ठतम व्यक्तियों का स्थान होना चाहिए। राजनीति ही सत्ता धारण करती है। देश की दिशा और दशा तय करती है। देश सही मार्ग पर चल सकता है यदि देश की राजनीति समाज के श्रेष्ठ व्यक्तियों के हाथ मे हो।
लेकिन विडंबना ये है कि देश और समाज का निकृष्टम व्यक्ति आज राजनीति में है। जिसमे कोई रचनात्मकता नहीं है वो राजनीति में है। जिनकी महत्वाकांक्षाएं सघन है, जिनमे ताकत की भूख है वही राजनीति में आने को उत्सुक हैं। राजनीति करने का वेतन नहीं मिलता। परिणामस्वरूप जो भ्रष्टाचार से पैसे बनाने में योग्य है वही राजनीति के योग्य है। अगर तुम्हारा राजनीतिक ढांचा ही समाज के योग्य और श्रेष्ठ व्यक्ति को आने से रोकता है तो स्वाभाविक है कि राजनीति लोभी, भ्रष्टाचारी, अनैतिक, बेईमान लोगो से भर जाए।
अभी तक राजनीति के स्याह पहलू आम समाज से छिपे रहते थे। लेकिन तकनीक के दौर में आज पूरा समाज जानता है कि हमारे नेता कितने ईमानदार, कितने नैतिक और कितने विचारधारा वादी है। सबसे प्रत्यक्ष उदाहरण अस्पष्ट बहुमत पर सरकार बनाते समय देखने को मिलते हैं। राजनीतिक दल अपने अपने सांसदों/विधायकों को छुपा देते हैं और दूसरों को ढूंढने के लिए निकल पड़ते हैं ताकि उनका सौदा हो सके। अभी तक तुम सिर्फ शक करते थे कि तुम्हारे नेता बिकाऊ हैं। अब तुम्हारे राजनीतिक दल ही इसका प्रमाण देते हैं कि उनके सांसद/विधायक बिकाऊ हैं। और ये नेता इतने बेशर्म हो जाते हैं कि एक दल से चुनाव लड़ते हैं, अपने दल के पक्ष में दलीलें देते हैं, दूसरे दल की आलोचना करते हैं। दूसरे दल के शीर्ष नेताओं को शायद गालियां भी निकलते होंगे। और चार दिन बाद ही दूसरे दल के सदस्य बन जाते हैं। जिन्हें गालियां दी थी उन्ही की चरण वंदना प्रारम्भ हो जाती है। इसे ये नाम भी बड़ा ही खूबसूरत देते हैं जैसे आत्मा की आवाज पर फैसला लिया। जिनकी आत्मा मरी हुई है वे भी आत्मा की आवाज़ तुम्हे सुना के बहला रहे हैं। और तुम सुने जा रहे हो क्योंकि तुम्हारा अपनी ही आत्मा से कोई परिचय नहीं है।
समाज के श्रेष्ठ व्यक्ति स्वयं चलकर आपके पास नहीं आएंगे। आपको उनसे निवेदन करना होगा। श्रेष्ठ व्यक्ति यदि अपना समय, अपनी योग्यता अपना श्रम समाज के लिए व्यय करेगा तो उसे इसका उचित मूल्य भी मिलना चाहिए। मूल्य मौद्रिक भी अमौद्रिक भी। अमौद्रिक मूल्य अर्थात वह इतनी अपेक्षा तो करेगा कि आप उससे सार्वजनिक जिम्मेदारी लेने के लिए निवेदन करें। यदि कोई योग्य व्यक्ति अपना जीवन समाज को देने को तैयार है तो समाज को उसका कृतज्ञ होना होगा। समाज यह अपेक्षा न करे कि योग्य व्यक्ति समाज के पास अपनी सेवाएं लेकर आएगा। आज जो भी लोग समाज के कार्य करने के इच्छुक हैं वे स्वयं आपके पास चलकर आ रहें हैं। और आप उनका स्तर परख सकते हैं। वे समाज के निकृष्टम व्यक्ति हैं। और वे आपके पास इसलिए चल कर नहीं आ रहे कि आपकी समस्याओ के प्रति कोई वेदना का भाव है, वे इसलिए आते हैं कि उन्हें ताकत पाने के लिए आपकी आवश्यकता है। वे आपके चरणों मे लेट जाने को भी तैयार हैं क्योंकि इसके अतिरिक्त उनके पास कोई तर्क नहीं, कोई योग्यता नहीं है। श्रेष्ठ व्यक्ति तो पहली बात आप तक आएगा नहीं, आपको ही उसके पास जाना होगा। यदि आया भी तो वो आपके चरण में न लेटेगा। उल्टे संभव है कि वह थोड़ा तनकर खड़ा रहे। उसके अंदर आत्मसम्मान होगा। उसकी रीढ़ थोड़ी मजबूत होगी। वह लोभी, भ्रष्ट और अनैतिक लोगों की भांति लचर न होगा।
हमे समाज के लिए कार्य करने वाले व्यक्ति, राजनीति में आने वाले व्यक्ति के लिए धनोपार्जन की व्यवस्था करनी होगी। हम स्वयं जिस व्यक्ति को निवेदन के साथ राजनीति के लिए लाएं, उसकी और उसके परिवार की आर्थिक आवश्यकताओं के लिए हमे व्यवस्था करनी होगी। उसकी सेवाओ का मूल्य चुकाना होगा। आज अच्छे लोग राजनीति में आने को उत्सुक नहीं। क्योंकि वे भ्रष्टाचार से पैसे नहीं कमा सकते। और समाज ने उनकी आर्थिक आवश्यकताओं की कोई व्यवस्था नहीं कर रखी। परिणामस्वरूप वही लोग राजनीति में आने को उत्सुक हैं जिनकी बेईमानी और भ्रष्टाचार से पैसे बना लेने में योग्यता है। देश की पूरी राजनीति भ्रष्ट लोगों से भर गई तो इसमें कोई आश्चर्य नहीं। जिसमे इतनी करुणा हो कि समाज की वेदना दिखाई दे सके उसे परिवार की वेदना तो पहले दिख ही जाएगी। परिवार का अहित करके समाज का भला नहीं हो सकता। परिवार समाज की ही छोटी इकाई है। अभी तक तुम्हारे तथाकथित अच्छे नेताओं ने समाज के लिए परिवारों के हितों को नजरअंदाज किया है। तुमने भी उन्हें आदर्श बनाया। लेकिन तुमने कभी गौर किया तुम्हारे ऐसे आदर्शों के घर से फिर कोई और आदर्श नहीं निकला।
आज पूरा राजनीतिक ढांचा बदलने की आवश्यकता है। राजनीति में प्रवेश के मानक तय किये जाने की आवश्यकता है। राजनीतिज्ञों की भी समय समय पर योग्यता की परीक्षा होनी चाहिए। राज्य और देश की राजनीति सिर्फ उन्हीं के हाथों में हो जो रचनात्मक प्रवृत्ति के, शान्त चित्त, राष्ट्र की भावना से भरे हो, जिन्हें मानव कल्याण के लिए कार्य करने का कोई अनुभव रहा हो।
...मैत्रेय
सार्थक लेख! साधुवाद!!
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